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मुंब्रा के रेतीबंदर में रेलवे अंडरपास की मांग तेज, देरी पर आंदोलन की चेतावनी

ठाणे। मुंब्रा के रेतीबंदर इलाके में प्रस्तावित रेलवे अंडरपास के निर्माण में हो रही देरी को लेकर स्थानीय निवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। क्षेत्र के लोग लंबे समय से सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन के लिए रेलवे अंडरपास की मांग कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2007 से यह मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से रोजाना आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने अब चेतावनी दी है कि यदि परियोजना पर जल्द ठोस कार्रवाई करते हुए निर्माण शुरू नहीं किया गया तो बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन फिर शुरू किया जाएगा। लोगों का कहना है कि यह मामला केवल आवागमन की सुविधा से नहीं, बल्कि रेलवे ट्रैक के आसपास लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
2007 से उठ रही अंडरपास की मांग
स्थानीय निवासियों के अनुसार, रेतीबंदर क्षेत्र में रेलवे अंडरपास बनाने की मांग करीब दो दशक से की जा रही है। वर्ष 2007 से स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को रेलवे और अन्य संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया जाता रहा है।
निवासियों का कहना है कि समय के साथ इलाके की आबादी और आवाजाही बढ़ी है, लेकिन लोगों को सुरक्षित तरीके से रेलवे लाइन के दूसरी ओर आने-जाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिल पाई है। इसी कारण अंडरपास को क्षेत्र की महत्वपूर्ण जरूरत बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि विभिन्न स्तरों पर उन्हें परियोजना आगे बढ़ाने के आश्वासन मिलते रहे, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हो पाया।
रोजाना आवागमन में हो रही परेशानी
रेतीबंदर क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि रेलवे लाइन के कारण स्थानीय आवागमन प्रभावित होता है। लोगों को रोजमर्रा के काम, स्कूल, बाजार, अस्पताल और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने में परेशानी होती है।
अंडरपास बनने से लोगों को रेलवे ट्रैक के आसपास जोखिम भरे तरीके से आवागमन करने की जरूरत कम हो सकती है। स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दैनिक यात्रियों को मौजूदा स्थिति में अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
इसी वजह से स्थानीय लोग इस परियोजना को केवल बुनियादी ढांचे का काम नहीं, बल्कि दैनिक जीवन और सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकता के रूप में देख रहे हैं।
रेलवे ट्रैक के आसपास सुरक्षा को लेकर चिंता
अंडरपास की मांग करने वाले लोगों ने रेलवे ट्रैक से जुड़ी सुरक्षा समस्याओं को भी प्रमुख मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि सुरक्षित क्रॉसिंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने पर लोगों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह मांग की जा रही है कि ऐसा वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जाए, जिससे लोगों को ट्रैक के आसपास असुरक्षित तरीके से आने-जाने की जरूरत न पड़े।
अंडरपास बनने की स्थिति में पैदल यात्रियों और स्थानीय वाहनों के लिए आवागमन अधिक व्यवस्थित हो सकता है। हालांकि परियोजना के अंतिम स्वरूप, डिजाइन और यातायात व्यवस्था का निर्धारण संबंधित एजेंसियों की तकनीकी योजना पर निर्भर करेगा।
बार-बार आश्वासन के बाद भी काम नहीं होने का आरोप
स्थानीय निवासियों और समुदाय के प्रतिनिधियों का आरोप है कि अंडरपास को लेकर रेलवे प्रशासन से कई बार आश्वासन मिले, लेकिन जमीन पर निर्माण शुरू नहीं हुआ।
लोगों का कहना है कि लंबी प्रतीक्षा के कारण अब उनके बीच असंतोष बढ़ रहा है। वे परियोजना की वर्तमान स्थिति, निर्माण शुरू होने की संभावित तारीख और देरी के कारणों को स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि परियोजना में देरी के सटीक प्रशासनिक या तकनीकी कारणों की विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि काम किस स्तर पर लंबित है और निर्माण शुरू करने से पहले कौन-कौन सी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं।
आंदोलन दोबारा शुरू करने की चेतावनी
समुदाय के नेताओं ने कहा है कि यदि अब भी निर्माण शुरू नहीं हुआ तो स्थानीय लोगों को फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। उन्होंने बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी है।
प्रतिनिधियों का कहना है कि लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन के सामने मांग रखी जा रही है। इसके बावजूद अपेक्षित प्रगति नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ी है।
स्थानीय संगठनों ने संबंधित अधिकारियों से परियोजना पर स्पष्ट समयसीमा जारी करने और निर्माण प्रक्रिया को तत्काल आगे बढ़ाने की मांग की है।
आबादी बढ़ने के साथ बढ़ी जरूरत
मुंब्रा और आसपास के क्षेत्रों में पिछले वर्षों में आबादी और शहरी गतिविधियों का विस्तार हुआ है। इसके साथ स्थानीय सड़कों और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा है।
रेतीबंदर के निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ती आवाजाही को देखते हुए अंडरपास की जरूरत पहले की तुलना में और अधिक हो गई है। सुरक्षित मार्ग उपलब्ध होने से स्थानीय स्तर पर यातायात को व्यवस्थित करने में भी मदद मिल सकती है।
लोगों का कहना है कि किसी बुनियादी ढांचा परियोजना के लिए करीब दो दशक तक इंतजार करना उनके लिए निराशाजनक है।
परियोजना की स्थिति स्पष्ट करने की मांग
स्थानीय निवासियों ने रेलवे प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियों से अंडरपास परियोजना की मौजूदा स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। वे जानना चाहते हैं कि प्रस्ताव को किन मंजूरियों की आवश्यकता है, अब तक कौन सी प्रक्रिया पूरी हुई है और निर्माण कब शुरू हो सकता है।
इसके अलावा स्थानीय प्रतिनिधियों ने मांग की है कि परियोजना में यदि किसी तकनीकी, वित्तीय या भूमि संबंधी समस्या के कारण देरी हो रही है तो उसकी जानकारी भी लोगों को दी जाए।
उनका कहना है कि स्पष्ट समयसीमा मिलने से लोगों के बीच बनी अनिश्चितता को कम किया जा सकता है।
अंडरपास बनने से हजारों लोगों को सुविधा की उम्मीद
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रस्तावित अंडरपास बनने से रेतीबंदर और आसपास के इलाकों के निवासियों को सुरक्षित रास्ता मिल सकेगा। इससे रेलवे ट्रैक के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच संपर्क भी बेहतर हो सकता है।
अंडरपास के माध्यम से पैदल यात्रियों के साथ स्थानीय यातायात को किस तरह संचालित किया जाएगा, यह परियोजना के स्वीकृत डिजाइन पर निर्भर करेगा।
फिलहाल स्थानीय निवासियों की सबसे बड़ी मांग निर्माण कार्य जल्द शुरू करने की है। समुदाय के नेताओं ने संकेत दिया है कि अब केवल आश्वासन स्वीकार नहीं किया जाएगा और परियोजना पर वास्तविक प्रगति नहीं दिखाई देने की स्थिति में आंदोलन तेज किया जा सकता है।
करीब 2007 से उठ रही रेलवे अंडरपास की मांग एक बार फिर रेतीबंदर में प्रमुख स्थानीय मुद्दा बन गई है। लोगों की नजर अब रेलवे प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के अगले कदम पर है। साथ ही परियोजना की वास्तविक स्वीकृति स्थिति, निर्माण समयसीमा और देरी के कारणों पर रेलवे की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है।





